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मल्लावां।आपको बताते चलें मल्लावां थाना के अंतर्गत राघोपुर मैं हथिया नाम से दो दिन का प्रसिद्ध मेला लगता है। और हाथी लकड़ी कंबल फूल कि माला हाथी बनाकर पूजाकी जाती है।और कई गांवों में घूमते हैं ।यह मेला आस्था का केंद्र है और आखिर क्यूं है आये आपको बताते चलते हैं। मल्लावां थाना के अंतर्गत राघोपुर मैं 300 वर्ष पूर्व एक राजा रहा करते थे।उनके भाई राघवदास नाम से जाने जाते थे। जो घर से नाराज होकर। ग्वालियर चले गए और राजा के भाई के यहां पहुंचे और उसके बाद राघव दास बाबा को हस्तबल मैं नौकरी करने को कहा ने हां कर दी।और बाबा को नौकरी करते करतें काफ़ी समय बीत गया और उसके बाद तभी राघोपुर के राजा के वहां नौकरी कर रहा है। तब राजा ने वहां पर आक्रमण कर दिया और ग्वालियर के राजा को पराजित कर दिया और तब दोनों लोगों के बीच सुलह समझौता हुआ।वहां पर अस्तबल मैं दो हाथी थे।वहीं पर एक सफेद हाथी था उसको सुलह समझौते से राघोपुर लेकर चले आए।और तभी से यहां पर होली के दूसरे दिन परिवार के साथ हाथी की पूजा अर्चना की गयी तथा यह कार्यक्रम जब तक हाथी जीवित रहा तब तक होता रहा और उसके बाद हाथी का रूप बन कर पारंपरिक तरीके से विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चना किया जाता है जो कि अभी तब चला आ रहा है। और साथ मैं मेला लगने लगा।और गांव के लोगों का कहना हे कि यहां मांगीं गयी हर मनौकामना पूरी होती है।यह जानकारी जयपाल सिंह,रेशु सिंह, रत्नेश सिंह,चंदू कश्यप,लीला कश्यप,मंगलू कश्यप,बबलू कश्यप सहित कहीं लोगों ने जानकारी दी।

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