संघर्ष थे जिनके मूल मंत्र, लड़कर तुम बढ़ना सीखो।
विचारों को आत्मसात करो, मरकर के जीना सीखो।।
विचारों को आदर्श बनाओ, अंगीकार कर जीना सीखो।
मूर्ति बनाकर याद न रखना, मरकर के जीना सीखो।।
सेवा, सद्कर्म संघर्षो से तुम, चाहत बनजाना सीखो।
दलितों-पिछड़ो पर हो जुल्म तो, मरकर के जीना सीखो।।
नेताजी से लड़ना सीखो, हक खातिर तुम मरना सीखो।
दिन-दुःखियों से प्यार करो तुम, मरकर के जीना सीखो।।
उनके आदर्शो पर चलकर, सक्षम बनना-जीना सीखो।
हर घर जाओ, संघर्ष बताओं, मरकर के जीना सीखो।।
छोड़ो पाखंड, कलम उठाओ, लड़कर तुम मरना सीखो।
जन-जन में समाजवादी ज्ञान डालकर, बढ़ना सीखो-2
पाखंड को पुख्ता करने से अच्छा हैं मा. नेताजी के संघर्षो को आत्मसात किया जाय न की जिनसे वें जिंदगी भर लड़े और हम सबको हक-अधिकार दिलाया उनके व्यवस्था में न उलझें और संघर्ष के रास्ते पर बढ़े यही सही मायने में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जय हिन्द! जय समाजवाद!!
मनोज मानव की कलम से...
Thanks for comment in my post