विदिशा: कहते हैं कि शादी-विवाह सात जन्मों का बंधन होता है. जिसे हर कोई यादगार बनाना चाहता है. लिहाजा इसे यादगार बनाने के लिए लोग कोई कसर नहीं छोड़ता. चाहे फिर बात जेब की हो या दिमाग की. खर्च करने में पूरी ताकत लगाते हैं. कोई हवाई जहाज से दुल्हन लाता है तो कोई बाईक को चुनता है. लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिलें में दो मुस्लिम नौजवानों की शादी की चर्चा अलग वजह से है. चर्चा की वजह है, उनकी शादी का कार्ड.
कहां का है यह मामला
इन दोनों मुस्लिम नौजवनों की शादी के कार्ड हिंदी भाषा में छपवाए गए और इन पर भगवान भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान राधाकृष्ण की भी फोटो छपी है. इन निमंत्रण पत्र में सुपुत्र, सुपुत्री के साथ प्रतिभोज, दर्शनाभिलाषी जैसे शब्दों का इस्तेमाल इस अपील के साथ किया गया है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है. देश में आज भी गंगा-जमनी तहज़ीब कायम है इसका सम्मान करें.
मरहूम रुस्तम खान के बेटे इरशाद और अंसार खान की शादी का कार्ड आनंदपुर से निकलकर अब सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है. आमतौर पर वे मुस्लिम भी जो कम पढ़े लिखे होते हैं शादी का कार्ड उर्दू या अंगरेजी में छपवाते हैं. मुस्लिम समाज में हिंदी और लाल रंग में निमंत्रण पत्र छपवाने से परहेज किया जाता है. जबकि इरशाद और अंसार खान की शादी के निमंत्रण पत्र में भगवान गणेश और राधाकृष्ण के चित्र के साथ हिंदू रीति-रिवाजों की तरह प्रकाशित कराया गया है.
यह शादी विदिशा जिले के आनंदपुर में रविवार को संपन्न हुई. एक साथ दोनों बेटों की शादियां तो मरहूम रुस्तम खान नहीं देख सके लेकिन उनके बेटों की शादी की चर्चा सोशल मीडिया पर है.

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