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अलविदा धरती पुत्र:मनोज मानव ने कविता लिखकर कुछ यूं दी धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि

संघर्ष थे जिनके मूल मंत्र, लड़कर तुम बढ़ना सीखो।
विचारों को आत्मसात करो, मरकर के जीना सीखो।।

विचारों को आदर्श बनाओ, अंगीकार कर जीना सीखो।
मूर्ति बनाकर याद न रखना, मरकर के जीना सीखो।।

सेवा, सद्कर्म संघर्षो से तुम, चाहत बनजाना सीखो।
दलितों-पिछड़ो पर हो जुल्म तो, मरकर के जीना सीखो।।

नेताजी से लड़ना सीखो, हक खातिर तुम मरना सीखो।
दिन-दुःखियों से प्यार करो तुम, मरकर के जीना सीखो।।

उनके आदर्शो पर चलकर, सक्षम बनना-जीना सीखो।
हर घर जाओ, संघर्ष बताओं, मरकर के जीना सीखो।।

छोड़ो पाखंड, कलम उठाओ, लड़कर तुम मरना सीखो।
जन-जन में समाजवादी ज्ञान डालकर, बढ़ना सीखो-2

पाखंड को पुख्ता करने से अच्छा हैं मा. नेताजी के संघर्षो को आत्मसात किया जाय न की जिनसे वें जिंदगी भर लड़े और हम सबको हक-अधिकार दिलाया उनके व्यवस्था में न उलझें और संघर्ष के रास्ते पर बढ़े यही सही मायने में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जय हिन्द! जय समाजवाद!!

मनोज मानव की कलम से...

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